राजस्थान के अलवर ज़िले में अरावली की ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों के बीच बसा सरिस्का टाइगर रिज़र्व आज भारत के सबसे रोचक वन्यजीव स्थलों में गिना जाता है। लगभग 1,200 वर्ग किलोमीटर में फैला यह अभयारण्य कभी अलवर के महाराजाओं का शिकारगाह था, लेकिन आज यहां 40 से अधिक रॉयल बंगाल टाइगर, तेंदुए, लकड़बग्घे और सैकड़ों पक्षी प्रजातियां सुरक्षित हैं।
सरिस्का सिर्फ जंगल सफारी तक सीमित नहीं है। यहां की प्राचीन धरोहरें, रहस्यमयी किले और आस्था से जुड़े मंदिर इसे एक सम्पूर्ण यात्रा अनुभव बनाते हैं। दिल्ली से कुछ ही घंटों की दूरी पर स्थित यह जगह रोमांच, अध्यात्म, इतिहास और प्रकृति का बेहतरीन संगम पेश करती है।
बाघों का ‘शून्य‘ से ‘शिखर‘ तक का सफर
सरिस्का के इतिहास में एक समय ऐसा भी आया था जब यहाँ एक भी बाघ नहीं बचा था। साल 2004-05 में शिकारियों के कारण सरिस्का पूरी तरह से ‘बाघ विहीन’ हो गया था। यह भारत के वन्यजीव इतिहास के लिए एक काला अध्याय था।
- बाघ पुनर्वास (Tiger Relocation): साल 2008 में सरिस्का ने इतिहास रचा जब यहाँ दुनिया का पहला ‘बाघ स्थानांतरण’ (Tiger Relocation) प्रयोग किया गया। रणथंभौर से बाघों को हेलीकॉप्टर के जरिए सरिस्का लाया गया।
- सफलता की गूँज: आज सरिस्का में बाघों और शावकों की संख्या 30 के पार पहुँच चुकी है। एसटी-1 और एसटी-2 जैसे शुरुआती बाघों की विरासत को आज उनके वंशज आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे यह रिजर्व एक बार फिर अपनी पुरानी रंगत में लौट आया है।
सरिस्का कैसे पहुंचें
सड़क मार्ग से: दिल्ली से सरिस्का की दूरी लगभग 200 किलोमीटर है, जिसे NH48 के जरिए 4–5 घंटे में तय किया जा सकता है। यह मार्ग सेल्फ-ड्राइव के लिए बेहतरीन है और रास्ते में ढाबों पर स्वादिष्ट भोजन का आनंद भी मिलता है। जयपुर से सरिस्का 180 किलोमीटर (करीब 3.5 घंटे) दूर है।
रेल मार्ग से: अलवर रेलवे स्टेशन सबसे नज़दीकी स्टेशन है, जो सरिस्का से लगभग 35 किलोमीटर दूर है। शताब्दी एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनें अलवर को दिल्ली और जयपुर से जोड़ती हैं।
हवाई मार्ग से: जयपुर एयरपोर्ट निकटतम हवाई अड्डा है। यहां से टैक्सी लेकर आसानी से सरिस्का पहुंचा जा सकता है।
RTDC की बसें और पैकेज टूर भी दिल्ली व जयपुर से उपलब्ध हैं।
ट्रैवल टिप: यदि झंझट मुक्त यात्रा चाहते हैं, तो RTDC के ट्रांसपोर्ट व स्टे के साथ आने वाले पैकेज एक अच्छा विकल्प हैं।

सरिस्का घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से जून तक सरिस्का टाइगर रिज़र्व खुला रहता है और यही घूमने का सबसे अच्छा समय माना जाता है।
- सर्दियां (अक्टूबर–फरवरी):* 10–25°C तापमान, आरामदायक सफारी और बर्ड वॉचिंग के लिए आदर्श।
- गर्मियां (मार्च–जून):* 30–40°C तक तापमान, लेकिन जल स्रोतों के पास बाघ दिखने की संभावना अधिक रहती है।
- मानसून (जुलाई–सितंबर):* कोर ज़ोन बंद रहता है क्योंकि यह प्रजनन का समय होता है।
प्रो टिप: वीकेंड पर भीड़ ज्यादा होती है, इसलिए Sariska Tiger Reserve Safari Booking पहले से कर लेना बेहतर है।
सरिस्का टाइगर रिज़र्व सफारी बुकिंग
सरिस्का यात्रा का मुख्य आकर्षण यहां की जंगल सफारी है। राजस्थान वन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से सफारी बुकिंग 120 दिन पहले शुरू हो जाती है।
- जीप सफारी: 6 लोगों के लिए (₹1200–1500), कोर ज़ोन में बाघ देखने का बेहतर मौका।
- कैंटर सफारी: 20 लोगों के लिए (₹800–1000), समूह यात्रियों के लिए उपयुक्त।
बेस्ट सफारी जोन: सरिस्का मुख्य रूप से चार जोन में बंटा है।
- जोन 1 और 2: यहाँ बाघों की साइटिंग की संभावना सबसे अधिक होती है क्योंकि यहाँ पानी के स्रोत ज्यादा हैं और बाघ अक्सर यहाँ विचरण करते दिखते हैं।
- जोन 3 और 4: यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और तेंदुए (Leopards) देखने की संभावना अधिक रहती है।
सुबह (6–9:30) और शाम (2:30–6) के स्लॉट सबसे लोकप्रिय हैं। भारतीय पर्यटकों के लिए एंट्री फीस ₹100 है, कैमरा शुल्क अलग से लगता है।

सरिस्का में कहां ठहरें
- RTDC Tiger Den Resort: पार्क के पास स्थित, सफारी के लिए सबसे सुविधाजनक।
- Samode Haveli सरिस्का: लग्ज़री और हेरिटेज का खूबसूरत मेल।
- सरिस्का फॉरेस्ट लॉज व अलवर पैलेस रिज़ॉर्ट: बजट यात्रियों के लिए अच्छे विकल्प।
- सिलीसेढ़ लेक पैलेस: झील किनारे रॉयल अनुभव चाहने वालों के लिए, हालांकि यह 40 किमी दूर है।
सरिस्का और आसपास के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1. पांडुपोल हनुमान जी मंदिर: जंगल के भीतर स्थित यह गुफा मंदिर 5 मीटर ऊंची हनुमान प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। मंगलवार और हनुमान जयंती पर यहां विशेष भीड़ रहती है।
2. कंकवारी किला: सरिस्का केवल बाघों तक सीमित नहीं है। यहाँ आप कंकवारी किला (Kankwari Fort) भी देख सकते हैं, जहाँ मुगल बादशाह औरंगजेब ने अपने भाई दारा शिकोह को कैद करके रखा था। 17वीं सदी का यह किला आज रहस्यमयी खंडहर बन चुका है। यहां कई बार बाघों को विश्राम करते देखा गया है।
3. नीलकंठ महादेव मंदिर: 10वीं सदी का यह शिव मंदिर अपनी प्राचीन नक्काशी और आध्यात्मिक वातावरण के लिए जाना जाता है।
4. भैरोंघाटी खनिज झरने: औषधीय गुणों वाले इन झरनों को स्थानीय लोग बेहद पवित्र मानते हैं।
5. यार्दावली हंटिंग लॉज: राजसी शिकारगाह का यह अवशेष सरिस्का के शाही अतीत की कहानी कहता है।
6. प्राचीन बावड़ियां: पारंपरिक जल संरक्षण की मिसाल, जो राजस्थान की वास्तुकला को दर्शाती हैं।
7. भानगढ़ किला (50 किमी): सरिस्का की यात्रा तब तक अधूरी है जब तक आप यहाँ से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित भानगढ़ किले (Bhangarh Fort) का रुख नहीं करते। इसे ‘एशिया की सबसे डरावनी जगह’ माना जाता है।

- इतिहास और श्राप: 17वीं शताब्दी में बना यह किला स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। कहा जाता है कि एक तांत्रिक के श्राप के कारण रातों-रात यह पूरा शहर बर्बाद हो गया था।
- एएसआई की चेतावनी: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने यहाँ बोर्ड लगा रखा है कि ‘सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले’ किले में प्रवेश वर्जित है। स्थानीय लोगों का मानना है कि आज भी यहाँ अजीबोगरीब आवाजें आती हैं और पैरानॉर्मल गतिविधियाँ महसूस की जाती हैं।
गतिविधियां, खानपान और शॉपिंग
जंगल सफारी के अलावा फोटोग्राफी, बर्ड वॉचिंग और लोक नृत्य कार्यक्रमों का आनंद लें। खाने में दाल बाटी चूरमा, लाल मांस, गट्टे की सब्ज़ी और केर सांगरी ज़रूर चखें।अलवर के बाज़ारों से बंधेज, ब्लू पॉटरी, चमड़े की जूतियां और मसाले खरीद सकते हैं।
पैकिंग टिप्स और लोकल ट्रांसपोर्ट
दूरबीन, कैमरा, टोपी, सनस्क्रीन, हल्की जैकेट, आरामदायक जूते और पानी की बोतल ज़रूर रखें। घूमने के लिए ऑटो और टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं।
4 दिन का सुझाया गया यात्रा कार्यक्रम
दिन 1: दिल्ली से ड्राइव, शाम को बफर सफारी
दिन 2: सुबह कोर सफारी, पांडुपोल हनुमान मंदिर
दिन 3: कंकवारी किला और सांस्कृतिक कार्यक्रम
दिन 4: अंतिम सफारी, भानगढ़ किला, जयपुर प्रस्थान
निष्कर्ष
सरिस्का टाइगर रिज़र्व सिर्फ एक जंगल नहीं, बल्कि अरावली की गोद में बसी कहानियों की भूमि है। यहां बाघों की दहाड़, मंदिरों की घंटियां और किलों की खामोशी मिलकर एक यादगार अनुभव रचती हैं।
अगर आप रोमांच और इतिहास दोनों को एक साथ जीना चाहते हैं, तो Sariska Tiger Reserve Safari Booking आज ही करें और राजस्थान की इस जंगली धड़कन को करीब से महसूस करें।
By: Anushka Singhal


