ओडिशा के हृदय में बसा भुवनेश्वर, जिसे प्यार से टेंपल सिटी कहा जाता है, प्राचीन मंदिरों के समूह, जीवंत संस्कृति और हरियाली से भरपूर अनुभवों के लिए जाना जाता है। ऊँचे शिखरों से गूंजती आरतियाँ, शिल्पकला से सजी गुफाएँ, वन्यजीवन के रोमांच और आधुनिक बाज़ार—यह शहर हर तरह के यात्री को कुछ खास देता है।
2,000 साल से भी पुराने इतिहास को अपने भीतर समेटे यह शहर ‘मंदिरों की नगरी’ के रूप में विश्व विख्यात है। यहाँ की हर गली और हर पत्थर कलिंग साम्राज्य के गौरवशाली अतीत की कहानी सुनाता है। अगर आप आध्यात्म, इतिहास और वन्यजीवों के शौकीन हैं, तो भुवनेश्वर आपके लिए एक मुकम्मल गंतव्य है।
भुवनेश्वर कैसे पहुँचें
हवाई मार्ग: बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली, मुंबई सहित कई शहरों से जुड़ा है। एयरपोर्ट से सिटी सेंटर की दूरी 3–6 किमी है, जिसे टैक्सी से लगभग 20 मिनट में तय किया जा सकता है।
रेल मार्ग: भुवनेश्वर जंक्शन और न्यू रेलवे स्टेशन पर चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु सहित प्रमुख शहरों से सुपरफास्ट ट्रेनें पहुँचती हैं। अन्य बड़े शहरों से भी नियमित कनेक्टिविटी उपलब्ध है।
सड़क मार्ग: पुरी (60 किमी) और कटक (40 किमी) से अच्छी सड़कों पर राज्य परिवहन बसें और कार से यात्रा आसान है।
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का मौसम (16–28°C) मंदिर दर्शन और आउटडोर एक्टिविटी के लिए आदर्श रहता है। जनवरी में एकाम्र उत्सव शहर को रंगीन सांस्कृतिक माहौल देता है। गर्मियों की तपिश और मानसून की भारी बारिश से बचना बेहतर रहता है।

भुवनेश्वर के प्रमुख दर्शनीय स्थल
लिंगराज मंदिर: भुवनेश्वर की पहचान यहाँ का लिंगराज मंदिर है। ११वीं शताब्दी में बना यह मंदिर भगवान शिव के ‘हरिहर’ स्वरूप (विष्णु और शिव का संगम) को समर्पित है। ५५ मीटर ऊँचा इसका मुख्य शिखर और पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी कलिंग शैली की वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है। ५ एकड़ में फैले इस विशाल मंदिर परिसर में १५० से अधिक छोटे मंदिर हैं, जहाँ की शांति और ऊर्जा पर्यटकों को एक अलग ही दुनिया में ले जाती है।
उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएँ: इतिहास प्रेमियों के लिए उदयगिरि और खंडगिरि की गुफाएं किसी खजाने से कम नहीं हैं। ये गुफाएं ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में राजा खारवेल के शासनकाल के दौरान जैन भिक्षुओं के रहने के लिए बनाई गई थीं। कुल ३३ गुफाओं में से ‘रानी गुफा’ और ‘हाथीगुंफा’ अपनी अद्भुत नक्काशी और शिलालेखों के लिए जानी जाती हैं। इन पहाड़ियों की चोटी से पूरे शहर का नजारा देखना एक यादगार अनुभव होता है।
नंदनकानन प्राणी उद्यान: प्रकृति और जानवरों से प्यार करने वालों के लिए नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क एक अनिवार्य पड़ाव है। इसे ‘स्वर्ग’ भी कहा जाता है और यह सफेद बाघों (White Tigers) के प्राकृतिक प्रजनन के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहाँ आप व्हाइट टाइगर सफारी, लॉयन सफारी और बोटिंग का आनंद ले सकते हैं। चिड़ियाघर के साथ ही स्थित बॉटनिकल गार्डन में दुर्लभ पौधों की प्रजातियां भी देखने को मिलती हैं।
चिल्का झील: करीब 100 किमी दूर एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील डॉल्फ़िन दर्शन, प्रवासी पक्षियों और द्वीप भ्रमण के लिए मशहूर है—प्रकृति प्रेमियों का स्वर्ग।
धौली शांति स्तूप: शहर के बाहरी इलाके में स्थित धौली पहाड़ वही स्थान है जहाँ भीषण ‘कलिंग युद्ध’ हुआ था। इसी युद्ध के बाद सम्राट अशोक का हृदय परिवर्तन हुआ और उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया। यहाँ बना सफेद ‘शांति स्तूप’ (Peace Pagoda) और पहाड़ पर उकेरे गए अशोक के शिलालेख आज भी अहिंसा और शांति का संदेश देते हैं। शाम के समय यहाँ होने वाला ‘लाइट एंड साउंड शो’ पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है।
रोमांचक गतिविधियाँ और शॉपिंग
- चिल्का झील में बोट क्रूज़ और बर्डवॉचिंग
- लिंगराज मंदिर परिसर के आसपास साइकिल टूर
- एकाम्र कला वन में सांस्कृतिक कार्यक्रम
- यूनिटरी मार्केट और बापूजी नगर में शॉपिंग—संबलपुरी साड़ियाँ, चाँदी की फिलिग्री ज्वेलरी, पत्तचित्र पेंटिंग, पत्थर की मूर्तियाँ और मसाले

भुवनेश्वर में ठहरने की जगहें
- Mayfair Lagoon – लग्ज़री अनुभव
- Welcomhotel by ITC, Swosti Premium – प्रीमियम कम्फर्ट
- Ginger, Swosti Grand – बजट और मिड-रेंज विकल्प
अधिकांश होटल मंदिरों के पास हैं और आधुनिक सुविधाएँ देते हैं।
भुवनेश्वर का स्वाद: कटक की दहीबारा आलूदम, बारा-घुगुनी, और स्थानीय मसालों से भरे स्ट्रीट फूड ज़रूर चखें। मार्केट बिल्डिंग जैसे इलाकों में स्वाद और वैरायटी दोनों मिलते हैं।
3-दिन का सुझाया यात्रा कार्यक्रम
दिन 1: सुबह लिंगराज मंदिर दर्शन → मुक्तेश्वर और राजारानी मंदिर → ओडिशा स्टेट म्यूज़ियम → शाम एकाम्र हाट।
दिन 2: उदयगिरि-खंडगिरि गुफाएँ → धौली हिल (अशोक के शिलालेख) → नंदनकानन सफारी।
दिन 3: चिल्का झील बोटिंग व बर्डवॉचिंग → वापसी पर स्थानीय बाज़ारों में शॉपिंग।
आसपास घूमने लायक स्थान
- कोणार्क सूर्य मंदिर (65 किमी) – यूनेस्को धरोहर
- धौली गिरी (8 किमी) – शांति स्तूप और अशोक शिलालेख
- रत्नागिरि (70 किमी) – बौद्ध अवशेष और मठ
निष्कर्ष
भुवनेश्वर की पवित्र शिलाएँ, गूंजती गुफाएँ, वन्यजीवन की हलचल और चिल्का की अथाह शांति—हर अनुभव यादों में घंटियों की तरह बजता रहता है। आध्यात्म, इतिहास और प्रकृति का यह संगम आपकी ओडिशा यात्रा को खास बना देता है। भुवनेश्वर आइए, मंदिर नगरी का जादू महसूस कीजिए।
By: Anushka Singhal


