मैसूर: कर्नाटक का शाही दिल

कर्नाटक का सांस्कृतिक रत्न मैसूर (मैसूरु) आज भी शाही ठाठ-बाट की खुशबू बिखेरता है। सुनहरे गुंबदों वाला महल, शाम होते ही रोशनी में नहाई सड़कें, मंदिरों की घंटियाँ, चमेली की महक और हरे-भरे बाग—यह शहर इतिहास और प्रकृति का खूबसूरत संगम है। सुबह पहाड़ियों पर धुंध के बीच मंदिरों की आरती गूंजती है, दोपहर बगीचों के फव्वारों में सुकून मिलता है और रात को मैसूर पैलेस की जगमगाहट आसमान को त्योहार बना देती है। रेशमी बाज़ारों में घूमते हुए गरम-गरम मैसूर पाक का स्वाद—मैसूर हर यात्री के दिल में उतर जाता है।

अपनी भव्य वास्तुकला, चंदन की भीनी खुशबू और रेशमी साड़ियों के लिए मशहूर मैसूर को ‘कर्नाटक की सांस्कृतिक राजधानी’ कहा जाता है। यहाँ की हर गली में इतिहास और आधुनिकता का एक अनूठा मेल देखने को मिलता है।

मैसूर कैसे पहुँचें

हवाई मार्ग: मैसूर एयरपोर्ट (MYQ) शहर से करीब 10 किमी दूर है। बेंगलुरु सहित प्रमुख शहरों से उड़ानें उपलब्ध हैं। एयरपोर्ट से टैक्सी से सीधे सिटी सेंटर पहुँचा जा सकता है।

रेल मार्ग: मैसूर जंक्शन बड़ा रेल हब है। चेन्नई (लगभग 7 घंटे), मुंबई और बेंगलुरु से शताब्दी/एक्सप्रेस ट्रेनें मिलती हैं।

सड़क मार्ग: बेंगलुरु से NH-275 पर करीब 3 घंटे का आरामदायक सफर है। बसें और सेल्फ-ड्राइव दोनों लोकप्रिय हैं।

शहर के भीतर: ऑटो, ऐप-कैब और ई-रिक्शा आसानी से मिल जाते हैं। महल और बाज़ार क्षेत्र में साइकिल रिक्शा अलग ही चार्म जोड़ते हैं।

मैसूर के प्रमुख दर्शनीय स्थल

1. मैसूर पैलेस: शहर की धड़कन कहलाने वाला यह इंडो-सारसेनिक शैली का महल वोडेयार वंश की शान है। 1897 की आग के बाद पुनर्निर्मित यह महल स्वर्ण सिंहासन, मयूर द्वार, झूमरों से सजे दरबार हॉल और रंगीन कांच के मंडपों के लिए प्रसिद्ध है। दशहरा के समय शाही जुलूस और रविवार की 1 लाख बल्बों वाली लाइटिंग इसे परी-लोक बना देती है।
नोट: अंदर कैमरा शुल्क अलग से लगता है; सादे और सम्मानजनक कपड़े पहनें।

मैसूर पैलेस

2. मैसूर चिड़ियाघर: एशिया के सबसे पुराने चिड़ियाघरों में शुमार यह स्थल बाघों, जिराफों, हाथियों और वॉक-थ्रू एवियरी के लिए मशहूर है—परिवारों के लिए परफेक्ट।

3. बृंदावन गार्डन: मैसूर की यात्रा तब तक अधूरी है जब तक आप वृंदावन गार्डन न जाएँ। कृष्णराज सागर (KRS) बांध के ठीक नीचे बना यह खूबसूरत गार्डन अपने ‘म्यूजिकल फाउंटेन’ (संगीतमय फव्वारे) के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। शाम के समय संगीत की धुनों पर थिरकते रंगीन फव्वारे और रोशनी का खेल बच्चों से लेकर बड़ों तक सबका दिल जीत लेता है।

बृंदावन गार्डन

4. करंजी झील: शांत झील किनारे बांसों की हरियाली, भारत का सबसे बड़ा वॉक-थ्रू एवियरी, बोटिंग और पक्षियों की चहचहाहट—सुकून का पता।

5. जगनमोहन पैलेस और लोक कला संग्रहालय: यहाँ राजा रवि वर्मा की पेंटिंग्स, टेराकोटा भित्तिचित्र और यक्षगान मुखौटे कर्नाटक की कला विरासत दिखाते हैं।

6. चामुंडी हिल्स: शहर से कुछ ही दूरी पर स्थित चामुंडी हिल्स न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यहाँ से पूरे मैसूर शहर का विहंगम नज़ारा भी दिखाई देता है। यहाँ का ‘चामुंडेश्वरी मंदिर’ माता दुर्गा को समर्पित है। पहाड़ी की चढ़ाई के दौरान आपको भगवान शिव के वाहन ‘नंदी’ की एक विशाल अखंड प्रतिमा (Monolithic Statue) और महिषासुर की रंगीन मूर्ति देखने को मिलेगी। यहाँ सुबह की ताजी हवा और आध्यात्मिक शांति मन को सुकून देती है।

मैसूर में ठहरने की बेहतरीन जगहें

प्रो टिप: सायाजी राव रोड के आसपास रुकें—पैलेस, चिड़ियाघर और बाज़ार पैदल दूरी पर मिल जाते हैं। दशहरा में पहले से बुकिंग करें।

मैसूर

मैसूर में क्याक्या करें

  1. बृंदावन गार्डन में सनसेट फाउंटेन शो
  2. करंजी झील में बोटिंग
  3. चामुंडी हिल्स ट्रेक—1,000 सीढ़ियाँ, ऊपर देवी चामुंडेश्वरी के दर्शन और घाटी का नज़ारा
  4. रेशम बुनकरों की गलियाँ—मैसूर सिल्क की खरीदारी
  5. देवराजा मार्केट शॉपिंग—चंदन साबुन, पान, मसाले
  6. श्रीरंगपट्टनम डेट्रिप (15 किमी)—टीपू सुल्तान का किला, इतिहास की गूंज

मैसूर में क्या खाएँ: सुबह मैसूर मसाला डोसा और फ़िल्टर कॉफी से दिन शुरू करें। दोपहर में जोलाड़ा रोटी, रागी मुड्डे, बिसी बेले भात चखें। मिठाई में गुप्ता कन्फेक्शनर्स का मैसूर पाक—घी की परतें मुँह में घुल जाती हैं। साहसी स्वाद के लिए मिर्ची बज्जी ट्राय करें।

घूमने का सबसे अच्छा समय और पैकिंग

अक्टूबर से फरवरी (18–28°C) सबसे बढ़िया समय है। दशहरा (अक्टूबर) में शहर उत्सव में डूब जाता है।
पैक करें: कॉटन कपड़े, मंदिरों के लिए शॉल, आरामदायक जूते, शाम के लिए हल्की ऊनी।

3-दिन का सुझाया यात्रा कार्यक्रम

दिन 1: सुबह मैसूर पैलेस दर्शन → देवराजा मार्केट → दोपहर मैसूर चिड़ियाघर → शाम करंजी झील बोटिंग → रात पैलेस लाइटिंग।
दिन 2: चामुंडी हिल्स → ललिता महल → जगनमोहन आर्ट गैलरी → सेंट फिलोमेना कैथेड्रल → रेल म्यूज़ियम।
दिन 3: श्रीरंगपट्टनम व रंगनाथिट्टू बर्ड सैंक्चुअरी → शाम बृंदावन गार्डन फाउंटेन शो।

निष्कर्ष

मैसूर केवल महलों और बागों का शहर नहीं, बल्कि कर्नाटक की आत्मा है। चामुंडी की घंटियाँ, फव्वारों की लय, बाज़ारों की महक और रेशम की चमक—यह सब मिलकर यादों में बस जाता है। यहाँ हर मोड़ पर कहानी है और हर फूल ठहरने को कहता है। मैसूर आएँ, शाही सुकून को महसूस करें।

By: Anushka Singhal

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