उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में 1,890 मीटर की ऊंचाई पर बसा कौसानी उन यात्रियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं, जो भीड़-भाड़ से दूर शांति और प्रकृति के करीब समय बिताना चाहते हैं। त्रिशूल, नंदा देवी और पंचाचूली जैसी बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियां यहां के आसमान को सजाती हैं। अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के कारण कौसानी को अक्सर “भारत का स्विट्ज़रलैंड” भी कहा जाता है।
सेब के बागान, हरियाली से भरे कौसानी टी एस्टेट, ठंडी पहाड़ी हवा और महात्मा गांधी से जुड़ा अनासक्ति आश्रम—यह सब मिलकर कौसानी को एक परफेक्ट हिल एस्केप बनाते हैं। दिल्ली से कौसानी की दूरी करीब 400 किलोमीटर है, जिससे यह वीकेंड या छोटे अवकाश के लिए आदर्श डेस्टिनेशन बन जाता है।
कौसानी की सबसे बड़ी यूएसपी यहाँ से दिखने वाला हिमालय है।
- सूर्योदय और सूर्यास्त: यहाँ सूर्योदय के समय हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियाँ जब सुनहरी होती हैं, तो वह दृश्य जादुई लगता है। शाम को यही चोटियाँ लाल और फिर चांदी जैसी सफेद हो जाती हैं।
- प्रमुख चोटियाँ: यहाँ से त्रिशूल (Trishul), नंदा देवी (Nanda Devi) और पंचचूली (Panchachuli) की चोटियाँ इतनी साफ़ दिखती हैं जैसे आप उन्हें हाथ बढ़ाकर छू लेंगे।
कौसानी कैसे पहुंचें
सड़क मार्ग से
दिल्ली से NH9 होते हुए हल्द्वानी और अल्मोड़ा के रास्ते कौसानी पहुंचा जा सकता है। सड़क यात्रा में करीब 10–12 घंटे लगते हैं। रास्ते में ढाबों पर गरम-गरम पराठे और चाय यात्रा को और भी यादगार बना देते हैं।
दिल्ली के आनंद विहार से हल्द्वानी/काठगोदाम के लिए UPSRTC या प्राइवेट वोल्वो बसें (₹800–1,500) उपलब्ध हैं। वहां से टैक्सी या साझा जीप (₹500–800) लेकर कौसानी पहुंच सकते हैं।
हवाई मार्ग से
निकटतम एयरपोर्ट पंतनगर है, जो कौसानी से लगभग 170 किलोमीटर दूर है। दिल्ली से पंतनगर की सीधी उड़ान के बाद टैक्सी से कौसानी पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग से
दिल्ली से काठगोदाम रेलवे स्टेशन तक रात की ट्रेनें उपलब्ध हैं। काठगोदाम या हल्द्वानी से उत्तराखंड परिवहन की बसें और टैक्सी नियमित रूप से चलती हैं।
प्रो टिप: बरसात के मौसम में पहाड़ी सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं, इसलिए मौसम की जानकारी जरूर जांच लें।
कौसानी घूमने का सबसे अच्छा समय
- अप्रैल से जून: 15–25°C का सुहावना मौसम, रोडोडेंड्रॉन के फूल और चाय बागानों की सैर के लिए बेहतरीन।
- सितंबर से नवंबर: साफ आसमान, सुनहरी घाटियां और फोटोग्राफी के लिए आदर्श।
- दिसंबर से फरवरी: बर्फबारी और हिमालय के स्पष्ट दृश्य, लेकिन ठंड ज्यादा (0–10°C)।
- जुलाई–अगस्त: हरियाली तो भरपूर, लेकिन भूस्खलन का खतरा।
कौसानी में घूमने की प्रमुख जगहें
अनासक्ति आश्रम: गांधीजी की यादों का बसेरा
कौसानी का इतिहास महात्मा गांधी से गहरा जुड़ा है।
- गांधीजी का प्रवास: 1929 में गांधीजी यहाँ कुछ समय के लिए रुके थे। यहाँ की शांति से प्रभावित होकर उन्होंने अपनी पुस्तक ‘अनासक्ति योग‘ की रचना यहीं की थी।
- संग्रहालय और शांति: आज इस आश्रम में एक छोटा सा संग्रहालय और शोध केंद्र है। यहाँ प्रार्थना सभाएं होती हैं और लोग ध्यान (Meditation) लगाने आते हैं। यहाँ से हिमालय का नज़ारा और भी भव्य दिखता है।
कौसानी टी एस्टेट: सुगंधित चाय के बागान

कौसानी की हरियाली में यहाँ के चाय के बागान चार चाँद लगा देते हैं।
- चाय की खुशबू: यहाँ 200 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैले चाय के बागान हैं। यहाँ की ‘गिरियास’ चाय दुनिया भर में निर्यात की जाती है।
- फैक्ट्री भ्रमण: पर्यटक यहाँ चाय की पत्तियों को चुनने की प्रक्रिया देख सकते हैं और फैक्ट्री में जाकर ताज़ा चाय का स्वाद ले सकते हैं। इन बागानों में टहलना एक रिफ्रेशिंग अनुभव होता है।
साहित्य और प्रकृति: सुमित्रानंदन पंत संग्रहालय
हिंदी साहित्य के महान कवि और प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत का जन्म कौसानी में ही हुआ था।
- पंत वीथिका: उनके पैतृक घर को अब एक संग्रहालय में बदल दिया गया है। यहाँ उनकी पांडुलिपियां, कविताएं और निजी वस्तुएं रखी गई हैं। साहित्य प्रेमियों के लिए यह किसी तीर्थ से कम नहीं है।
- रुद्रधारी जलप्रपात: कौसानी से थोड़ी दूरी पर स्थित यह झरना घने जंगलों और गुफाओं के बीच है, जो ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए बेहतरीन जगह है।
रुद्रधारी जलप्रपात
- छोटी ट्रेक के बाद मिलने वाला यह झरना जंगलों और गुफाओं से घिरा हुआ है।
बैजनाथ मंदिर
- 12वीं शताब्दी का यह प्राचीन शिव मंदिर कौसानी से करीब 17 किमी दूर स्थित है।
कौसानी में ठहरने के विकल्प
कौसानी में हर बजट के लिए होटल और होमस्टे उपलब्ध हैं।
- बजट: KMVN Tourist Rest House, अनासक्ति आश्रम के पास।
- मिड-रेंज: Chevron Eco Lodge, रिवरसाइड व्यू पैलेस—शानदार घाटी दृश्य और बोनफायर।
- लग्ज़री: Krishna Mountview Resort—स्पा और पैनोरमिक हिमालयी व्यू।
- होमस्टे: अल्मोड़ा रोड के गांवों में कुमाऊंनी मेहमाननवाज़ी और घर का खाना।

कौसानी का प्रसिद्ध कुमाऊंनी भोजन
यहां भट्ट की चुरकानी, आलू के गुटके, मडुआ रोटी, बाल मिठाई और सिंगौरी जरूर चखें। चाय बागान की ताज़ी चाय का स्वाद अनुभव को और खास बना देता है।
5 दिन का सुझाया गया यात्रा कार्यक्रम
दिन 1: दिल्ली से काठगोदाम/पंतनगर पहुंचकर कौसानी, शाम को चाय बागान की सैर
दिन 2: अनासक्ति आश्रम और कौसानी टी एस्टेट
दिन 3: बैजनाथ मंदिर और सुमित्रानंदन पंत गैलरी
दिन 4: बागेश्वर भ्रमण और सनसेट प्वाइंट
दिन 5: स्थानीय बाजार से खरीदारी और वापसी
निष्कर्ष
कौसानी शोर नहीं मचाता, बल्कि धीरे-धीरे दिल में उतर जाता है। यहां की ठंडी हवा, चाय की खुशबू और हिमालय की चमकती चोटियां हर यात्री को भीतर से सुकून देती हैं। अगर आप एक शांत, प्राकृतिक और आध्यात्मिक यात्रा की तलाश में हैं, तो कौसानी आपके लिए एक परफेक्ट हिल स्टेशन है।
By: Anushka Singhal


