उत्तर प्रदेश की पवित्र धरती पर बसा प्रयागराज, जिसे पहले इलाहाबाद कहा जाता था, भारत की उन गिनी-चुनी नगरीयों में है जहाँ आस्था, इतिहास और संस्कृति एक साथ प्रवाहित होते हैं। त्रिवेणी संगम—जहाँ गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती का मिलन माना जाता है—यहाँ की आत्मा है। यही वह भूमि है जहाँ कुंभ मेला करोड़ों श्रद्धालुओं को शुद्धि और मोक्ष की कामना के साथ आकर्षित करता है, और जहाँ अकबर किला मुग़ल वैभव की कहानियाँ सुनाता है।
पवित्र घाटों की शांति, भीड़भाड़ वाले बाज़ारों की रौनक और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत—प्रयागराज यात्रियों, इतिहास प्रेमियों और जिज्ञासु घुमक्कड़ों के लिए एक संपूर्ण अनुभव बन जाता है।
‘तीर्थराज’ (तीर्थों के राजा) के रूप में विख्यात यह शहर न केवल हिंदुओं का प्रमुख धार्मिक केंद्र है, बल्कि भारतीय राजनीति, न्याय और शिक्षा का भी एक बड़ा स्तंभ रहा है।
प्रयागराज की मिट्टी में जहाँ एक ओर वेदों की ऋचाएं गूँजती हैं, वहीं दूसरी ओर यहाँ की सड़कों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम की कई बड़ी कहानियाँ देखी हैं।

प्रयागराज कैसे पहुँचें?
प्रयागराज तक पहुँचना आसान है, क्योंकि शहर सड़क, रेल और हवाई मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है।
By Air
- बमरौली एयरपोर्ट (IXD)—शहर से 12 किमी
- दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु से सीधी उड़ानें
- एयरपोर्ट से टैक्सी/ऑटो द्वारा 20–30 मिनट
By Rail
- प्रयागराज Junction (PRYJ) और नैनी जंक्शन प्रमुख स्टेशन
- दिल्ली से शताब्दी एक्सप्रेस—लगभग 6 घंटे
- मुंबई/कोलकाता से रात की आरामदायक ट्रेनें
By Road
- लखनऊ (5 घंटे), वाराणसी (3 घंटे), दिल्ली (10 घंटे)
- UPSRTC बसें और प्राइवेट AC वोल्वो उपलब्ध
- यमुना एक्सप्रेसवे से सेल्फ-ड्राइव सुगम
त्रिवेणी संगम: आस्था और मोक्ष की धारा
प्रयागराज का सबसे बड़ा आकर्षण त्रिवेणी संगम है। यहाँ तीन नदियों—गंगा, यमुना और सरस्वती—का मिलन होता है।
- संगम स्नान: हिंदू धर्म में मान्यता है कि संगम में डुबकी लगाने से जन्म-जन्मांतर के पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
- कुंभ मेला (Kumbh Mela): यहाँ हर 12 साल में ‘महाकुंभ’ और हर 6 साल में ‘अर्धकुंभ’ का आयोजन होता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा मानव जमावड़ा है, जिसे UNESCO ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी है।
- माघ मेला: हर साल जनवरी-फरवरी में यहाँ माघ मेला लगता है, जहाँ श्रद्धालु (कल्पवासी) एक महीने तक संगम तट पर रहकर संयम और भक्ति का जीवन बिताते हैं।
ऐतिहासिक धरोहर: अकबर का किला और अशोक स्तंभ
प्रयागराज का इतिहास सदियों पुराना है, जिसकी गवाही यहाँ की इमारतें देती हैं:
- इलाहाबाद किला (Allahabad Fort): 1583 में सम्राट अकबर द्वारा निर्मित यह किला वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है। यह संगम के ठीक किनारे स्थित है।
- पातालपुरी मंदिर और अक्षयवट: किले के भीतर स्थित पातालपुरी मंदिर एक भूमिगत मंदिर है। यहीं पर अक्षयवट (अमर वृक्ष) स्थित है, जिसके दर्शन के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं।
- अशोक स्तंभ: किले के भीतर सम्राट अशोक का शिलालेख है, जिस पर समुद्रगुप्त की प्रशस्ति भी अंकित है, जो भारत के प्राचीन इतिहास का महत्वपूर्ण प्रमाण है।
स्वतंत्रता संग्राम की यादें: आनंद भवन और आज़ाद पार्क
भारत की आजादी की लड़ाई में प्रयागराज का योगदान अतुलनीय रहा है:
- आनंद भवन (Anand Bhavan): यह नेहरू-गांधी परिवार का पैतृक निवास स्थान था। आज इसे एक शानदार संग्रहालय में बदल दिया गया है, जहाँ स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी महत्वपूर्ण वस्तुएं और दस्तावेज़ रखे गए हैं।
- चंद्रशेखर आज़ाद पार्क (अल्फ्रेड पार्क): इसी स्थान पर महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद ने अंग्रेजों से लड़ते हुए खुद को गोली मारकर शहादत दी थी। यहाँ उनकी एक विशाल प्रतिमा है जो युवाओं को प्रेरित करती है।
पूर्व का ऑक्सफोर्ड: इलाहाबाद विश्वविद्यालय
प्रयागराज अपनी उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के कारण कभी ‘पूर्व का ऑक्सफोर्ड’ (Oxford of the East) कहा जाता था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने देश को कई प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश और दिग्गज साहित्यकार (जैसे हरिवंश राय बच्चन) दिए हैं।
प्रयागराज का स्वाद और संस्कृति
- इलाहाबादी अमरूद: यहाँ के लाल रंग वाले अमरूद (Red Guava) देश-विदेश में अपनी मिठास के लिए प्रसिद्ध हैं।
- खान–पान: यहाँ की दही–जलेबी, कचौड़ी–सब्जी और दम आलू का स्वाद चखे बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है।

प्रयागराज घूमने का सबसे अच्छा समय (Best Time to Visit)
अक्टूबर–मार्च (सबसे उपयुक्त)
- दिन का तापमान: 20–25°C
- ठंडी शामें, संगम और घाटों की सैर के लिए आदर्श
- कुंभ/माघ मेला और अन्य धार्मिक आयोजन
अप्रैल–जून: भीषण गर्मी, आउटडोर गतिविधियाँ सीमित
जुलाई–सितंबर: हरियाली बढ़ती है, लेकिन बाढ़ की संभावना
खास अनुभव: सर्दियों की सुबह संगम पर उठती धुंध—अविस्मरणीय दृश्य।
प्रयागराज में कहाँ ठहरें?
प्रो टिप: संगम या सिविल लाइंस के पास होटल चुनें।
- Hotel Kanha Shyam, Grand Continental (Civil Lines), साफ कमरे, शाकाहारी भोजन, संगम से 10 मिनट
- UPSTDC Tourist Bungalow बजट-फ्रेंडली, किले के पास नदी का नज़ारा
- Hotel Polo Star, Bloom Mansion, Treebo Divine Stay Prayagraj, Shalom A Boutique Stay बेहतर सुविधाएँ, AC, स्विमिंग पूल
- धर्मशालाएँ (रहरिया घाट के पास) तीर्थयात्रियों के लिए सरल और किफायती
Hidden Gems और Detours
- अल्फ्रेड पार्क (चंद्रशेखर आज़ाद पार्क)
- मनकामेश्वर मंदिर—रहस्यमयी सुरंगें
- फाफामऊ घाट—शांत नाव सैर
पास के डिटूर
- कौशांबी (60 किमी)—प्राचीन स्तूप
- वाराणसी (120 किमी)—आध्यात्मिक सर्किट
- लखनऊ (200 किमी)—नवाबी विरासत
3-Day Sample Itinerary
Day 1: आगमन → त्रिवेणी संगम नाव सैर व आरती → अकबर किला सनसेट → चाट ट्रेल
Day 2: इलाहाबाद म्यूज़ियम → बड़े हनुमान जी → आनंद भवन → बाज़ार भ्रमण
Day 3: अल्फ्रेड पार्क → खरीदारी (पेड़ा/साड़ी) → वैकल्पिक वाराणसी डिटूर
निष्कर्ष
प्रयागराज सिर्फ एक तीर्थ नहीं, बल्कि जीवन के संगम की यात्रा है—जहाँ नदियाँ दर्शन कराती हैं, किले इतिहास के प्रहरी बनकर खड़े हैं और हर नाव-सैर, हर निवाला आपको इसकी शाश्वत कहानी का हिस्सा बना देता है। आइए, डुबकी लगाइए, ठहरिए, और इसकी शांति अपने साथ घर ले जाइए।
By: Anushka Singhal


