बरोट घाटी: हिमाचल की नदी किनारे छुपी जन्नत

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में 1,835 मीटर की ऊँचाई पर स्थित बरोट घाटी उन यात्रियों के लिए किसी छुपे हुए खजाने से कम नहीं है, जो भीड़-भाड़ वाले हिल स्टेशनों से दूर शांत, प्राकृतिक और आत्मिक सुकून की तलाश में निकलते हैं। यहाँ उहल नदी पहाड़ी जंगलों को चीरते हुए बहती है, ओक और देवदार के जंगल हवा को ठंडा रखते हैं और ट्राउट मछलियों से भरे फार्म घाटी में जीवन की हलचल पैदा करते हैं।

कभी ब्रिटिश काल की हाइडल प्रोजेक्ट साइट रही यह जगह आज ट्रेकर्स, एंगलिंग लवर्स और नेचर फोटोग्राफर्स की पसंदीदा घाटी बन चुकी है। यहाँ की गद्दी जनजाति की सादगी और गर्मजोशी इस अनुभव को और भी खास बना देती है।

मनाली और शिमला जैसे भीड़-भाड़ वाले पर्यटन स्थलों से दूर, बरोट घाटी प्रकृति प्रेमियों और रोमांच चाहने वालों के लिए एक आदर्श गंतव्य है। बरोट का इतिहास इसके प्राकृतिक सौंदर्य से जुड़ा हुआ है, जहाँ ब्रिटिश काल की इंजीनियरिंग और हिमालय की भव्यता का अनूठा मेल देखने को मिलता है।

बरोट का ऐतिहासिक महत्त्व: शानन परियोजना

बरोट घाटी को मूल रूप से एक प्राकृतिक स्थल के बजाय एक महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजना के लिए विकसित किया गया था:

  • शानन परियोजना (Shanan Hydel Project): बरोट घाटी की स्थापना 1920 के दशक में शानन जलविद्युत परियोजना के लिए की गई थी। यह परियोजना ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल बंटी और मंडी के राजा जोगिंदर सेन के बीच एक समझौते का परिणाम थी। यह परियोजना भारत में मेगावाट क्षमता की पहली जलविद्युत परियोजनाओं में से एक थी।
  • ऊहल नदी का मोड़: बरोट में ऊहल नदी पर एक बांध बनाया गया, जो नदी के पानी को सुरंगों के माध्यम से जोगिंदरनगर में शानन पावर हाउस तक मोड़ता है। यह इंजीनियरिंग का एक शानदार नमूना है।
  • फ्यूनिकुलर ट्रॉली: जोगिंदरनगर को बरोट से जोड़ने के लिए निर्माण के दौरान एक फ्यूनिकुलर ट्रॉली प्रणाली भी बनाई गई थी, जो अब ऐतिहासिक महत्त्व रखती है।
बरोट घाटी

बरोट घाटी कैसे पहुँचें?

बरोट घाटी तक पहुँचना आसान है और रास्ता बेहद खूबसूरत।

दिल्ली से

  • दूरी: लगभग 450 किमी
  • समय: 10–12 घंटे
  • रूट: दिल्ली → चंडीगढ़ → मंडी → जोगिंदर नगर → बरोट

हवाई मार्ग

  • नज़दीकी एयरपोर्ट: भुंतर (कुल्लू) – 90 किमी
  • भुंतर से टैक्सी द्वारा लगभग 3 घंटे

रेल मार्ग

  • नज़दीकी रेलवे स्टेशन: जोगिंदर नगर (टॉय ट्रेन)
  • यहाँ से बरोट: 60 किमी | 2 घंटे टैक्सी से

बस और लोकल कनेक्टिविटी

  • HRTC बसें जोगिंदर नगर तक
  • आगे साझा टैक्सी या सेल्फ ड्राइव
  • अंतिम 12 किमी का रास्ता संकरा लेकिन रोमांचक, उहल नदी के साथ-साथ चलता है

👉 नोट: सड़कें साल भर खुली रहती हैं, लेकिन मानसून में लैंडस्लाइड की स्थिति जरूर जांचें।

बरोट घाटी

बरोट घाटी घूमने का सबसे अच्छा समय

बरोट का मौसम साल भर सुहावना रहता है। मार्च से जून (ट्रेकिंग और आउटडोर गतिविधियों के लिए) और सितंबर से नवंबर (साफ नजारों के लिए) यहाँ आने का सबसे अच्छा समय है। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण मानसून (जुलाई-अगस्त) में आने से बचना चाहिए।

नदी किनारे आरामदायक ठहराव

  • Wild Highs Luxury Camps / Trout Valley Resort
    उहल नदी के किनारे टेंट, बोनफायर और ट्राउट BBQ
  • Rakkh Resort
    नार्गू वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के पास आरामदायक स्टे
  • लोकल होमस्टे (Barot Village)
    गद्दी परिवारों के साथ रहकर घर का बना खाना, ट्रेक टिप्स और लोकल कहानियाँ

ट्रेकिंग, हाइकिंग और छुपे हुए रत्न

बरोट ट्रेकिंग के दीवानों के लिए स्वर्ग है। यहाँ से बड़ा भंगाल, कुल्लू, मनाली, बीर बिलिंग (पैराग्लाइडिंग साइट) और कोठी जैसे कई सुंदर ट्रेक मार्गों तक जाया जाता है। बरोट से कोठी तक का 13 किलोमीटर का ट्रेक देवदार और चीड़ के घने जंगलों से होकर गुजरता है।

1. Bada Gran Trek

  • दूरी: 12 किमी | समय: 5–6 घंटे
  • देवदार के जंगल, अल्पाइन मीडोज और शांत ग्रान गांव
  • पुराने हाइडल प्रोजेक्ट की हॉलेज ट्रॉली से नदी पार करना रोमांच से भरपूर

2. Nargu Wildlife Sanctuary

बरोट घाटी इस अभयारण्य का प्रवेश द्वार है, जो ऊहल नदी के दूसरी ओर स्थित है। यह अभयारण्य हिमालयन मोनाल, ब्लैक बेयर (काला भालू) और घोरल जैसे कई वन्यजीव प्रजातियों का निवास स्थान है। कुल्लू की ओर जाने वाले ट्रेकिंग मार्ग इसी अभयारण्य से होकर गुजरते हैं।

 3. Kareri Lake Trek

  • मल्टी-डे ट्रेक
  • ग्लेशियर से बना नीला झील जल
बरोट घाटी

बरोट घाटी के आसपास घूमने लायक जगहें

  • देव पाशाकोट मंदिर – ऊहल नदी के किनारे स्थित, देव पाशाकोट मंदिर स्थानीय देवता को समर्पित है, जो वर्षा के देवता माने जाते हैं।
  • चुहार घाटी – शिवरात्रि मेले और घने जंगल
  • मसरूर रॉक टेम्पल – 8वीं सदी के शैल मंदिर
  • ट्राउट फिशिंग – बरोट ऊहल नदी में ट्राउट मछली (Brown Trout और Rainbow Trout) पकड़ने के लिए पूरे भारत में मशहूर है। यहाँ मत्स्यपालन विभाग द्वारा संचालित एक ट्राउट फिश फार्म भी है, जहाँ मछली का प्रजनन होता है। मछली पकड़ने के शौकीन लोग परमिट लेकर यहाँ ट्राउट मछली पकड़ने आते हैं।
  • रिवर कैंपिंग और स्टार गेज़िंग – ऊहल नदी के किनारे और आसपास के घास के मैदानों (जैसे ठंडी गोलाई) में पर्यटक कैंपिंग का आनंद लेते हैं।

क्या पैक करें और क्या खाएं?

  • हल्के कपड़े, फ्लीस, रेन जैकेट
  • ट्रेकिंग शूज़, टॉर्च, पावर बैंक
  • सनस्क्रीन, कीट-नाशक
  • प्लास्टिक बिल्कुल न छोड़ें—घाटी पर्यावरण-संवेदनशील है

Extended Holiday के लिए सुझाया गया Itinerary

Barot + Prashar Lake (7 Days)

  • Day 1: दिल्ली/चंडीगढ़ → मंडी
  • Day 2: मंडी → बरोट | ट्राउट फार्म, नदी किनारे कैंप
  • Day 3: नार्गू सैंक्चुअरी हाइक, देव पाशाकोट, फिशिंग
  • Day 4: बड़ा ग्रान ट्रेक, चुहार घाटी
  • Day 5: बरोट → पराशर झील (बिजली महादेव डिटूर)
  • Day 6: प्राशर में ट्रेक और स्टार गेज़िंग
  • Day 7: मंडी मार्केट → वापसी

निष्कर्ष

बरोट घाटी कोई चमक-दमक वाला टूरिस्ट स्पॉट नहीं है—यह उहल नदी की धीमी सरगम, सुबह ट्राउट की छलांग, और धुंध में खोती पगडंडियों का अनुभव है। यहाँ समय थम सा जाता है। आप चरवाहों के साथ चलते हैं, आकाशगंगाओं के नीचे कैंप लगाते हैं और हिमालय की असली आत्मा से जुड़ते हैं।

जो भारतीय यात्री शोर से दूर, शांति के बीच खुद को ढूंढना चाहता है—बरोट घाटी उसके लिए घर जैसा है।

By: Anushka Singhal

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