हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले में ऊँचे-ऊँचे देवदार के जंगलों और बर्फ से ढकी चोटियों के बीच स्थित है पराशर झील (Prashar Lake) — एक ऐसी झील जहाँ प्रकृति और अध्यात्म का अद्भुत संगम दिखाई देता है।
2,730 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह झील अपने रहस्यमयी तैरते द्वीप और हज़ारों साल पुराने पराशर मंदिर के कारण प्रसिद्ध है। यह झील सिर्फ़ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है जो हर यात्री के दिल में बस जाता है।
कैसे पहुँचे पराशर झील
मंडी से पराशर झील की दूरी लगभग 48–51 किलोमीटर है। यह दूरी कार, टैक्सी या लोकल बस से करीब डेढ़ से दो घंटे में तय की जा सकती है।
यह मार्ग मंडी – बिजानी – कमांद – बग्गी गाँव से होकर गुजरता है। आख़िरी पड़ाव में रास्ता घने देवदार और पाइन के जंगलों के बीच ऊपर की ओर चढ़ता है, जो हर मोड़ पर नई खूबसूरती दिखाता है।

अगर आप रोमांच के शौकीन हैं, तो बग्गी से पराशर झील तक का ट्रेक (लगभग 8–9 किलोमीटर) ज़रूर करें। इस ट्रेक में हरे-भरे मैदान, चरवाहों की झोपड़ियाँ और बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं का नज़ारा देखने को मिलता है।
ट्रेकिंग में करीब 4–5 घंटे लगते हैं और यह शुरुआती ट्रेकर्स के लिए भी उपयुक्त है।
पराशर झील का रहस्य और आध्यात्मिक शांति
पराशर झील की सबसे रहस्यमयी बात है — इसका तैरता द्वीप जो समय-समय पर अपनी जगह बदलता रहता है। वैज्ञानिक आज तक इसकी गहराई नहीं माप पाए हैं।
झील के किनारे स्थित प्राचीन पराशर मंदिर हिमाचली वास्तुकला की अद्भुत मिसाल है। लकड़ी की नक्काशी और त्रिस्तरीय पगोड़ा शैली की छत इसे खास बनाती है।
यह मंदिर ऋषि पराशर को समर्पित है, और यहाँ की हवा में एक अद्भुत शांति का एहसास होता है।
शाम के समय जब सूरज की किरणें झील पर सुनहरी चमक बिखेरती हैं और रात में आकाश तारों से भर जाता है, तो यह दृश्य किसी सपने जैसा लगता है। यहाँ कैंपिंग का अनुभव हर यात्री के लिए अविस्मरणीय होता है।
पराशर झील का नाम महर्षि पराशर (Sage Parashar) के नाम पर रखा गया है, जो वेद व्यास के पिता और वशिष्ठ ऋषि के पौत्र थे। माना जाता है कि महर्षि पराशर ने इसी स्थान पर वर्षों तक तपस्या की थी।

- महाभारत काल से जुड़ाव: स्थानीय लोक कथाओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडव जब देवता कमरूनाग के साथ लौट रहे थे, तब कमरूनाग को यह शांत और मनोरम स्थान इतना भाया कि उन्होंने यहीं बसने का निश्चय किया। तब पांडवों में सबसे बलशाली भीम ने अपनी कोहनी से पर्वत पर वार किया, जिससे एक बड़ा गड्ढा बन गया और उसी गड्ढे में पराशर झील का निर्माण हुआ।
- पैगोडा शैली का मंदिर: झील के किनारे 13वीं शताब्दी में मंडी के राजा बान सेन ने महर्षि पराशर को समर्पित तीन मंजिला पैगोडा शैली का मंदिर बनवाया था। इसकी लकड़ी की नक्काशी हिमाचल की प्राचीन वास्तुकला का शानदार नमूना है और यह मंदिर इस स्थान के आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ाता है।
पराशर झील के आसपास कहाँ ठहरें
पराशर झील के आसपास और मंडी में ठहरने के लिए कई विकल्प हैं:
- SPT Clarks Inn Suites, मंडी: आरामदायक शहर में ठहराव और आसान पहुँच।
- Regent Palms Hotel, मंडी: सुबह जल्दी निकलने वालों के लिए उपयुक्त।
- Prashar Lake Kishna Camp: झील के सबसे नज़दीक स्थित कैंप साइट; शाम के सूर्यास्त दर्शन और गाइडेड ट्रेक के साथ।
- Fogg Hill Cottages, Heavenly Forest Huts: बग्गी गाँव के पास मध्यम बजट वाले सुंदर विकल्प।
- लोकल होमस्टे: गाँवों में स्थानीय परिवारों के साथ रहना, देसी भोजन और बोनफ़ायर कहानियाँ – हिमाचली संस्कृति का असली अनुभव।
👉 नोट: गर्मी और सर्दियों के मौसम में अग्रिम बुकिंग ज़रूरी है।
यात्रा की तैयारी
- गर्म कपड़े, जैकेट और ऊनी टोपी साथ रखें – रातें ठंडी होती हैं।
- मजबूत ट्रेकिंग शूज़, पानी की बोतल, एनर्जी बार्स और ड्राई फ्रूट्स रखें।
- रेन जैकेट, टोपी, सनस्क्रीन और धूप का चश्मा ज़रूरी हैं।
- कैंपिंग के लिए स्लीपिंग बैग, टॉर्च और फर्स्ट एड किट साथ रखें।
- कचरा न फैलाएँ और झील की पवित्रता बनाए रखें।
- मंदिर में जाते समय सभ्य परिधान पहनें और फोटोग्राफी के दौरान सावधानी बरतें।
बिजली महादेव मंदिर
यदि आप अपनी यात्रा को और यादगार बनाना चाहते हैं, तो बिजली महादेव मंदिर का भ्रमण ज़रूर करें।
मंडी से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर अपनी अद्भुत कथा के लिए प्रसिद्ध है — कहा जाता है कि हर 12 वर्ष में यहाँ बिजली गिरती है और शिवलिंग टूट जाता है, जिसे स्थानीय लोग मक्खन और आटे से जोड़ते हैं।
यहाँ तक पहुँचने के लिए 2–3 किलोमीटर का पैदल रास्ता है, जो ऊपर से कुल्लू घाटी का मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है।
अन्य घूमने योग्य स्थान
- बरोट घाटी: शांत वातावरण, मछली पकड़ने और नेचर वॉक के लिए उपयुक्त।
- शिकारी देवी मंदिर: ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए स्वर्ग समान स्थान।
- रेवालसर झील: हिंदू, बौद्ध और सिख श्रद्धालुओं का पवित्र स्थल।
- जिभी और तीर्थन घाटी: आराम, नदी किनारे ठहराव और स्थानीय होमस्टे का बेहतरीन अनुभव।
घूमने का सही समय
अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर तक का मौसम सबसे अनुकूल होता है। इस समय हरियाली, साफ आसमान और ठंडी हवाएँ यात्रियों का स्वागत करती हैं।
अगर आप बर्फ देखना चाहते हैं, तो जनवरी और फरवरी में आएँ — झील जमी होती है और चारों ओर सफ़ेद चादर बिछी होती है।
जुलाई–अगस्त के मानसून में भूस्खलन के कारण यात्रा कठिन हो सकती है।
स्थानीय भोजन और यात्रा सुझाव
मंडी या बग्गी से टैक्सी किराए पर लें या स्थानीय बसों का उपयोग करें।
ट्रेक मार्ग पर गाँववाले बेहद मददगार हैं।
यहाँ के ढाबों में हिमाचली सिद्दू, दाल-चावल, दही और चाय ज़रूर चखें।
ट्रेकिंग के दौरान हल्का भोजन करें और हमेशा पर्याप्त पानी साथ रखें।
निष्कर्ष
पराशर झील सिर्फ एक प्राकृतिक झील नहीं, बल्कि हिमालय की गोद में बसा एक पवित्र अनुभव है।
यहाँ की हवा में शांति है, झील में रहस्य है और आसमान में अनगिनत तारों की कहानी।
चाहे आप रोमांच के खोजी हों या सुकून के यात्री — पराशर झील आपके दिल में बस जाएगी, और शायद, आप भी इस रहस्यमयी झील में अपना एक हिस्सा छोड़ आएँगे।
By: Anushka Singhal


