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गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित श्री सोमनाथ मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है। अरब सागर की लहरें जब मंदिर के प्रांगण से टकराती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे स्वयं प्रकृति शिव स्तुति कर रही हो। सदियों के आक्रमणों के बाद भी यह मंदिर हर बार पुनर्निर्मित हुआ और आज अटूट श्रद्धा का प्रतीक बनकर खड़ा है।
सुबह की आरती में शंखनाद गूंजता है, दोपहर में समुद्री हवा मन को शांति देती है और शाम को दीपों की रोशनी लहरों पर थिरकती दिखाई देती है। सोमनाथ केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि इतिहास, अध्यात्म और समुद्री सौंदर्य का संगम है।
साल 2026 भारत के सांस्कृतिक इतिहास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह वर्ष महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ पर किए गए विनाशकारी हमले के 1000 वर्ष और आज़ाद भारत में मंदिर के आधुनिक पुनरुद्धार के 75 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। अरब सागर के तट पर स्थित सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय अस्मिता और ‘विनाश पर सृजन की विजय’ का सबसे बड़ा उदाहरण है।
पौराणिक शुरुआत: सोने, चांदी और चंदन का मंदिर
प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, सोमनाथ मंदिर का निर्माण चार चरणों में हुआ था। माना जाता है कि:
- सतयुग में स्वयं चन्द्रदेव (सोम) ने इसे सोने से बनवाया था।
- त्रेतायुग में रावण ने इसे चांदी से निर्मित किया।
- द्वापरयुग में भगवान श्रीकृष्ण ने इसे चंदन की लकड़ी से बनवाया।
- ऐतिहासिक काल में राजा भीमदेव ने इसे पत्थर से स्वरूप दिया।
सोमनाथ कैसे पहुंचें?
हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा दीव Airport (लगभग 80 किमी) और राजकोट एयरपोर्ट (230 किमी) है। यहां से टैक्सी द्वारा आसानी से सोमनाथ पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग: Veraval Junction (5 किमी) निकटतम रेलवे स्टेशन है। अहमदाबाद और मुंबई से नियमित ट्रेनें उपलब्ध हैं।
सड़क मार्ग: अहमदाबाद से सोमनाथ की दूरी लगभग 400 किमी है। NH-27 के जरिए 7–8 घंटे की सुंदर रोड ट्रिप आपको गिर के जंगलों और समुद्री तटों के बीच से होकर ले जाती है।
अहमदाबाद से सोमनाथ दूरी और यात्रा टिप्स: अहमदाबाद से सोमनाथ तक लगभग 400 किमी का सफर है। सुबह जल्दी निकलें तो सूर्योदय के समय मंदिर दर्शन का सौभाग्य मिल सकता है। ट्रेन से सफर आरामदायक और किफायती विकल्प है।
सोमनाथ में घूमने की प्रमुख जगहें
1️ श्री सोमनाथ मंदिर: चालुक्य शैली में 1951 में पुनर्निर्मित यह भव्य मंदिर 49 मीटर ऊंचा है। इसका पुनर्निर्माण सरदार पटेल की पहल पर हुआ और उद्घाटन भारत के प्रथम राष्ट्रपति Rajendra Prasad ने किया। मंदिर का इतिहास 1026 ई. में महमूद गजनवी के आक्रमण से लेकर कई बार पुनर्निर्माण की कहानी कहता है।
शाम की आरती और लाइट एंड साउंड शो श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।

2️ सोमनाथ बीच और लाइटहाउस: मंदिर से कुछ ही कदम की दूरी पर स्थित यह समुद्र तट सूर्योदय और सूर्यास्त के लिए प्रसिद्ध है। लाइटहाउस से समुद्र और मंदिर का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
3️ भालका तीर्थ और गीता मंदिर: Bhalka Tirth वह स्थान माना जाता है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने देह त्यागी। पास ही स्थित Geeta Mandir में भगवद गीता के श्लोक अंकित हैं।
4️ त्रिवेणी संगम: Triveni Sangam Somnath हिरेन, सरस्वती और अरब सागर का संगम स्थल है। यहां स्नान और पूजा का विशेष महत्व है।
सोमनाथ जाने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त है। तापमान 18–28 डिग्री के बीच रहता है। कार्तिक पूर्णिमा और महाशिवरात्रि पर विशेष आयोजन होते हैं।
सोमनाथ में ठहरने की व्यवस्था
समुद्र तट के पास लग्जरी रिसॉर्ट से लेकर बजट धर्मशालाएं उपलब्ध हैं। प्रभास पाटन और वेरावल क्षेत्र में Sarovar Portico, Lemon Tree Resort जैसे अच्छे होटल विकल्प मिल जाते हैं।

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3 दिन की परफेक्ट सोमनाथ यात्रा योजना
पहला दिन: सुबह मंदिर दर्शन, बीच वॉक और भालका तीर्थ भ्रमण।
दूसरा दिन: त्रिवेणी संगम स्नान, लाइटहाउस व्यू और शाम की आरती।
तीसरा दिन: गिर नेशनल पार्क या दीव की सैर।
क्या करें, क्या खरीदें और क्या खाएं?
✔ आरती और लाइट शो में शामिल हों
✔ प्रभास पाटन बाजार से रुद्राक्ष माला और स्मृति चिन्ह खरीदें
✔ गुजराती व्यंजन जैसे थेपला, उंधियू, खमन और मंदिर का प्रसाद चखें
आसपास घूमने की जगहें
- Gir National Park (50 किमी) – एशियाई शेरों का घर
- Diu (80 किमी) – समुद्र तट और किले
- Dwarka (200 किमी) – भगवान कृष्ण की नगरी
निष्कर्ष
सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारतीय आस्था की अमर गाथा है। अरब सागर की लहरों के बीच खड़ा यह ज्योतिर्लिंग हर भक्त को साहस, श्रद्धा और शांति का संदेश देता है। अगर आप गुजरात यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो सोमनाथ को अपनी सूची में अवश्य शामिल करें।
हर हर महादेव! 🙏
By: Anushka Singhal


