समुद्र तल से करीब 3,000 मीटर की ऊंचाई पर बसा सुराल भटोरी हिमाचल प्रदेश की दुर्गम पांगी घाटी का एक शांत और आध्यात्मिक गांव है। बर्च (भोजपत्र) के घने जंगल, अल्पाइन घास के मैदान और दूर तक फैली जांस्कर पर्वतमाला की बर्फीली चोटियां इस गांव को स्वर्गिक रूप देती हैं।
सुबह होते ही मठ की घंटियों की ध्वनि और चरवाहों की पुकार वातावरण को जीवंत करती है। दोपहर में जंगली फूलों से सजे ट्रेकिंग मार्ग झरनों तक ले जाते हैं और शाम को तारों भरे आकाश के नीचे घी के दीयों की रोशनी मन को शांति देती है। सुराल भटोरी बौद्ध संस्कृति और पहाड़ी जीवन का अनोखा संगम है।
यदि आप दुनिया की भीड़भाड़ और शोर-शराबे से पूरी तरह कट जाना चाहते हैं, तो हिमाचल प्रदेश की पांगी घाटी (Pangi Valley) में बसा सुराल भटोरी आपका इंतजार कर रहा है। ‘भटोरी’ शब्द का अर्थ है वह गांव जहाँ बौद्ध समुदाय के लोग (भोट) रहते हैं। यह गांव न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए, बल्कि अपनी समृद्ध बौद्ध संस्कृति के लिए भी जाना जाता है।
यहाँ के लोग मुख्य रूप से खेती और पशुपालन पर निर्भर हैं। उनकी वेशभूषा, खान-पान और ‘पांगवाली’ बोली पर्यटकों को एक अलग सांस्कृतिक अनुभव देती है। सर्दियों में जब यह इलाका 10-15 फीट बर्फ की चादर से ढक जाता है, तो यहाँ का जीवन पूरी तरह बदल जाता है, और स्थानीय लोग घरों के अंदर रहकर पारंपरिक हस्तशिल्प का काम करते हैं।
साहसिक सफर: सच्च पास की चुनौती
सुराल भटोरी पहुँचना ही अपने आप में एक बड़ा रोमांच है। पर्यटकों को यहाँ पहुँचने के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक और रोमांचक रास्तों में से एक ‘सच्च पास‘ (Saach Pass) को पार करना होता है।
- पथरीले रास्ते: यहाँ की सड़कें कच्ची और संकरी हैं, जहाँ एक तरफ ऊंचे पहाड़ और दूसरी तरफ गहरी खाई है।
- ट्रेकिंग: एडवेंचर के शौकीनों के लिए सुराल भटोरी कई ऊंचे दर्रों (Passes) जैसे कि ‘तिनती दर्रा’ की ओर जाने का बेस कैंप भी है।

Image Source of सुराल भटोरी @ mysterioushimachal
सुराल भटोरी कैसे पहुंचे?
हवाई मार्ग: कांगड़ा का गग्गल एयरपोर्ट (लगभग 180 किमी) और कुल्लू का भुंतर एयरपोर्ट (200 किमी) निकटतम हवाई अड्डे हैं। यहां से टैक्सी लेकर किलाड़ पहुंचें, फिर बस या जीप से सुराल भटोरी जाएं।
रेल मार्ग: पठानकोट (200 किमी) और ऊना (220 किमी) प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं। यहां से चंबा होते हुए सच पास पार कर किलाड़ पहुंचा जा सकता है।
सड़क मार्ग: चंबा से सच पास (जून–अक्टूबर) के रास्ते या मनाली–उदयपुर मार्ग से किलाड़ पहुंचें। किलाड़ से सुराल भटोरी लगभग 25–30 किमी दूर है, जहां तक कच्ची सड़कों से 1.5–2 घंटे में पहुंचा जा सकता है।
घूमने का सबसे अच्छा समय
अप्रैल से नवंबर के बीच मौसम (10°C–20°C) सुहावना रहता है। इस दौरान सच पास खुला रहता है और घास के मैदान हरे-भरे दिखते हैं। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण मार्ग बंद हो सकता है।
साथ रखें: गर्म कपड़े, रेनकोट, मजबूत ट्रेकिंग शूज, सनस्क्रीन और पानी की बोतल।
सुराल भटोरी के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1️ सुराल भटोरी मठ (ताशी छोलिंग गोम्पा): पांगी घाटी का सबसे पुराना और प्रमुख बौद्ध मठ ताशी छोलिंग गोम्पा बर्च के पवित्र वृक्षों के बीच स्थित है। यहां स्वर्णिम बुद्ध प्रतिमा और शांत ध्यान स्थल श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। शाम की पूजा में शामिल होकर आप बौद्ध परंपरा का अनुभव कर सकते हैं।
2️ चाबी झरना: लगभग 100 फीट ऊंचा चाबी झरना टिंगलोटी पास के पास स्थित है। गांव से 1–2 घंटे की ट्रेकिंग के बाद यह झरना दिखाई देता है। जुलाई से सितंबर के बीच इसका जलप्रवाह सबसे अधिक होता है।

चाबी झरना
3️ सुराल मीडोज और बर्च वन: अल्पाइन घास के मैदानों में चरते याक और भोटिया चरवाहों की झोपड़ियां इस क्षेत्र की पहचान हैं। यहां ट्रेकिंग, फोटोग्राफी और सूर्यास्त का दृश्य बेहद खास होता है।
4️ तिल्मिल पानी स्रोत: किलाड़ मार्ग पर स्थित तिल्मिल पानी प्राकृतिक औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है। यात्रियों के लिए यह एक ताजगी भरा पड़ाव है।
सुराल भटोरी में ठहरने की व्यवस्था
- स्थानीय भोटिया होमस्टे (पारंपरिक भोजन और आग के पास बैठने का अनुभव)
- मीडोज के पास कैंपिंग
- किलाड़ में गेस्टहाउस (ऊंचाई के अनुकूलन के लिए उपयुक्त)
3 दिन की सुराल भटोरी यात्रा योजना
दिन 1: किलाड़ पहुंचें, सुराल भटोरी जाएं और मठ में शाम की पूजा में शामिल हों। सूर्यास्त के समय मीडोज में सैर करें।
दिन 2: सुबह चाबी झरने की ट्रेकिंग करें। दोपहर में बर्च जंगलों में पिकनिक मनाएं और शाम को गोम्पा में ध्यान करें।
दिन 3: तिल्मिल पानी स्रोत और टिंगलोटी पास की सैर करें। स्थानीय चरवाहों से बातचीत कर पहाड़ी जीवन को करीब से जानें।

सुराल भटोरी में क्या करें?
- झरनों और घास के मैदानों में ट्रेकिंग
- मठ में ध्यान और पूजा में भाग लें
- याक राइड और फोटोग्राफी
- स्थानीय हस्तशिल्प की खरीदारी
- पहाड़ी संस्कृति का अनुभव
सुराल भटोरी का स्थानीय भोजन
सिद्दू , चना मदरा, थुकपा सूप, मित्ठा, पारंपरिक धाम थाली
होमस्टे में परोसा जाने वाला स्थानीय भोजन सादगी और स्वाद का बेहतरीन उदाहरण है।
आसपास घूमने की जगहें: किलाड़ (30 किमी), चंबा (180 किमी), धारवास गांव, हुडान भटोरी मीडोज
निष्कर्ष
सुराल भटोरी हिमालय की गोद में बसा एक शांत और आध्यात्मिक गंतव्य है। यहां मठों की शांति, झरनों की गूंज और घास के मैदानों की अनंत हरियाली हर यात्री को सुकून देती है। सुराल भटोरी उन लोगों के लिए है जो ‘ऑफबीट’ यात्रा के शौकीन हैं। यहाँ की कच्ची सड़कें, प्राचीन मठ और बर्फ से लदी चोटियाँ आपको अहसास कराती हैं कि असली भारत आज भी इन दुर्गम पहाड़ों में सुरक्षित है।
यदि आप भीड़-भाड़ से दूर प्रकृति और अध्यात्म का अनुभव करना चाहते हैं, तो सुराल भटोरी आपकी अगली यात्रा का आदर्श ठिकाना है।
By: Anushka Singhal


