पार्वती घाटी की ऊंचाइयों पर 3,200 मीटर की ऊंचाई पर बसा मलाणा अपने रहस्यमयी इतिहास और अनोखी लोकतांत्रिक व्यवस्था के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध है। देवदार की लकड़ी से बने पारंपरिक कोठार, संकरी पत्थर की गलियां और नीचे बहती मलाणा नाला इस गांव को प्राकृतिक और सांस्कृतिक रूप से अनूठा बनाते हैं।
सुबह की शुरुआत जमलू ऋषि मंदिर की घंटियों से होती है, जहां गांव के नियम और परंपराएं आज भी देवता के आदेश से संचालित होती हैं। दिन में पर्यटक देव टिब्बा की बर्फीली चोटियों के दृश्य देखने के लिए ट्रेक करते हैं और शाम को पीर पंजाल की तारों भरी छांव में यह गांव अपने अलग संसार में डूब जाता है।
मलाणा केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि 5,000 साल पुरानी मानी जाने वाली परंपराओं और स्वतंत्र पहचान का जीवंत उदाहरण है। यह गाँव अपनी अनोखी सामाजिक संरचना, प्राचीन परंपराओं और कड़े नियमों के लिए दुनिया भर में चर्चा का विषय बना रहता है। समुद्र तल से लगभग 9,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित मलाणा को ‘दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र’ (World’s Oldest Democracy) माना जाता है।
यहाँ के निवासी खुद को बाकी दुनिया से अलग और श्रेष्ठ मानते हैं। माना जाता है कि यहाँ के लोग ‘सिकंदर महान’ के सैनिकों के वंशज हैं।
सावधान! यहाँ कुछ भी छूना मना है (The “No-Touch” Policy)
मलाणा की सबसे हैरान करने वाली बात यहाँ का ‘अछूत’ नियम है। यहाँ के लोग बाहरी लोगों के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। यदि आप मलाणा जा रहे हैं, तो आपको इन 5 चीजों को भूलकर भी नहीं छूना चाहिए:
- स्थानीय निवासी: आप यहाँ के किसी भी व्यक्ति को छू नहीं सकते। यदि आप उन्हें कुछ सामान देते हैं या पैसे देते हैं, तो उसे जमीन पर रखना होता है।
- मंदिर और धार्मिक स्थान: जमलू ऋषि का मंदिर गाँव का सबसे पवित्र स्थान है। इसकी दीवारों या सीढ़ियों को छूना अपराध माना जाता है।
- घर की दीवारें: पर्यटकों को गाँव के घरों की दीवारों या संपत्ति को छूने की अनुमति नहीं है।
- राशन और पानी: दुकानों पर सामान लेते समय आप खुद सामान नहीं उठा सकते; दुकानदार खुद उसे जमीन पर रखेगा।
- पवित्र पत्थर: गाँव में कई ऐसे स्थान और पत्थर हैं जो पूजनीय हैं, उन्हें स्पर्श करना वर्जित है।
नोट: यदि कोई पर्यटक गलती से भी इन चीजों को छू लेता है, तो उस पर 2,500 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इस राशि का उपयोग देवता को खुश करने के लिए ‘बलि’ देने या शुद्धिकरण के लिए किया जाता है।

मलाणा कैसे पहुंचे?
हवाई मार्ग: भुंतर एयरपोर्ट (कुल्लू) मलाणा से लगभग 60 किमी दूर है। यहां से टैक्सी लेकर जरी (Jari) पहुंचें और वहां से 4 किमी की ट्रेकिंग या जीप मार्ग से मलाणा पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग: जोगिंदर नगर रेलवे स्टेशन (करीब 100 किमी) निकटतम स्टेशन है। यहां से बस या टैक्सी द्वारा जरी होते हुए मलाणा पहुंचें।
सड़क मार्ग: मनाली या कुल्लू से कसोल होते हुए जरी तक सड़क मार्ग उपलब्ध है। जरी से अंतिम 4 किमी का रास्ता ट्रेक या कच्ची सड़क से तय करना होता है।
घूमने का सबसे अच्छा समय
मई–जून और सितंबर–अक्टूबर के बीच मौसम (10°C–25°C) सुहावना रहता है। मानसून में रास्ते फिसलन भरे हो जाते हैं और सर्दियों में भारी बर्फबारी से गांव कट सकता है।
साथ रखें: गर्म कपड़े, रेनकोट, ट्रेकिंग शूज और स्थानीय नियमों का पालन करने की तैयारी।

मलाणा के प्रमुख दर्शनीय स्थल
1️ जमलू ऋषि मंदिर: मलाणा का सबसे पवित्र स्थल जमलू ऋषि मंदिर है। स्थानीय लोग मानते हैं कि गांव की शासन व्यवस्था देवता के आदेश से चलती है। मंदिर की लकड़ी की दोहरी छत और पारंपरिक वास्तुकला आकर्षण का केंद्र है। यहां बाहरी लोगों को सीधे मंदिर या घरों को छूने की अनुमति नहीं होती।
2️ देव टिब्बा का दृश्य: 6,001 मीटर ऊंचा देव टिब्बा पर्वत मलाणा से स्पष्ट दिखाई देता है। गांव के ऊपरी हिस्से से हिमाच्छादित चोटियों और ग्लेशियर का शानदार दृश्य मिलता है। ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए यह खास अनुभव है।
3️ मलाणा गांव का मुख्य क्षेत्र: दो मंजिला लकड़ी के कोठार, पारंपरिक पंचायत व्यवस्था और ‘कनाशी’ भाषा इस गांव को विशिष्ट पहचान देते हैं। यहां की लोकतांत्रिक व्यवस्था को एशिया की सबसे पुरानी लोकतांत्रिक प्रणाली माना जाता है।
4️ रशोल देवी मंदिर: मलाणा से लगभग 2 किमी की दूरी पर स्थित यह मंदिर शांत वातावरण और सुंदर घास के मैदानों के लिए प्रसिद्ध है।
मलाणा में ठहरने की व्यवस्था
- पार्वती कुटीर जैसे बेसिक गेस्टहाउस
- छत पर कैंपिंग सुविधा
- आरामदायक ठहराव के लिए कसोल या जरी में होटल

3 दिन की मलाणा यात्रा योजना
दिन 1: जरी से ट्रेक करते हुए मलाणा पहुंचें। गांव की गलियों में घूमें और सूर्यास्त के समय देव टिब्बा का दृश्य देखें।
दिन 2: रिज ट्रेक करें और रशोल देवी मंदिर जाएं। स्थानीय संस्कृति और पंचायत प्रणाली के बारे में जानें।
दिन 3: सुबह मंदिर क्षेत्र में पूजा अनुष्ठान देखें और फिर तोष या खीरगंगा की ओर ट्रेक करें।
मलाणा में क्या करें?
- देव टिब्बा व्यू ट्रेक
- स्थानीय देवता अनुष्ठानों का अवलोकन
- रिज फोटोग्राफी
- पारंपरिक बाजार का भ्रमण
मलाणा का स्थानीय भोजन: सिद्दू, चना मदरा, राजमा चावल, भांग लस्सी (स्थानीय पेय)
स्थानीय गेस्टहाउस में परोसा जाने वाला पहाड़ी भोजन सादा और स्वादिष्ट होता है।
आसपास घूमने की जगहें: खीरगंगा (20 किमी), कसोल (15 किमी), तोष गांव, पार्वती नदी कैंपिंग
निष्कर्ष
मलाणा हिमाचल का एक ऐसा गांव है जहां लोकतंत्र, आस्था और प्रकृति का अनूठा संगम दिखाई देता है। देवदार की खुशबू, देव टिब्बा की बर्फीली चोटियां और जमलू ऋषि की परंपराएं इस गांव को खास बनाती हैं।
यदि आप भीड़ से दूर एक अलग और रहस्यमयी अनुभव चाहते हैं, तो मलाणा की यात्रा जरूर करें।
By: Anushka Singhal


