उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित भीमताल एक शांत और सुरम्य पहाड़ी शहर है, जिसका नाम महाभारत के भीम से जुड़ा हुआ है। सात तालों में से एक इस स्थान का नाम सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता का अद्वितीय मेल प्रस्तुत करता है। नैनीताल से लगभग 22 किलोमीटर दूर स्थित यह जगह अपने शांत वातावरण, फैली हुई झील, हरे-भरे पहाड़ों और आध्यात्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है।
भीमताल का नाम हिंदू महाकाव्य महाभारत के शक्तिशाली पांडव भाई भीम के नाम पर पड़ा है। स्थानीय कथाएँ बताती हैं कि भीम ने अपनी गदा से भूमि को खोदकर इस विशाल झील का निर्माण किया था। नैनीताल झील से भी बड़ी होने के कारण यह कुमाऊं क्षेत्र की सबसे बड़ी झीलों में से एक है। झील के केंद्र में स्थित एक छोटा द्वीप इसकी सुंदरता को और बढ़ाता है, जहाँ एक लोकप्रिय मछलीघर भी है। भीमताल सिर्फ एक झील नहीं, यह एक ऐसा स्थान है जहाँ आप इतिहास, प्रकृति और शांति का अनुभव करते हैं।
कैसे पहुंचे भीमताल:
नैनीताल से भीमताल की दूरी लगभग 45 मिनट की ड्राइव है और यह सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। टैक्सी या बस द्वारा यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।
अन्य मार्ग:
- रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम (21 किमी दूर)
- हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर (55 किमी दूर)
भीमताल झील: शहर का दिल
कुमाऊं क्षेत्र की सबसे बड़ी झील भीमताल, इस क्षेत्र की पहचान है। झील के बीच स्थित द्वीप और चारों ओर फैली पहाड़ियों के दृश्य मंत्रमुग्ध कर देते हैं। यहां बोटिंग और कायकिंग प्रमुख आकर्षण हैं। झील के बीच स्थित ‘Aquarium Island Cafe’ बच्चों और परिवारों के लिए एक प्रमुख स्थल है, जहाँ विभिन्न प्रजातियों की मछलियाँ देखने को मिलती हैं।
भीमताल के प्रमुख दर्शनीय स्थल:
- विक्टोरिया डैम और भीमेश्वर महादेव मंदिर: झील के किनारे बना यह डैम फूलों की छतों से घिरा हुआ है। पास ही स्थित शिव मंदिर आध्यात्मिकता से जोड़ता है।
- हनुमान गढ़ी: सूर्यास्त के सुनहरे नज़ारे और शांत वातावरण के लिए यह मंदिर एक अद्भुत स्थान है।
- हिडिंबा पर्वत और वनखंडी आश्रम: ट्रैकिंग प्रेमियों के लिए यह स्थल आदर्श है, जहाँ विविध वनस्पति और जीवों के दर्शन होते हैं।
- नल–दमयंती ताल, सातताल और नौकुचियाताल: यह तीनों झीलें भी कम प्रसिद्ध लेकिन अत्यंत सुंदर हैं, जहाँ पिकनिक, फोटोग्राफी और वाटर स्पोर्ट्स का मज़ा लिया जा सकता है।

- बटरफ्लाई रिसर्च सेंटर: भारत के सबसे बड़े बटरफ्लाई संग्रह में से एक यहाँ है, जो खासतौर पर बच्चों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
- लोक संस्कृति संग्रहालय: उत्तराखंड की लोक परंपराओं, वाद्य यंत्रों और चित्रकलाओं को देखने का उत्तम स्थान।
क्या मिस न करें:
- एडवेंचर स्पोर्ट्स: पैराग्लाइडिंग, ज़िपलाइन और रॉक क्लाइंबिंग जैसे साहसिक खेल।
- फोटोग्राफी और स्टारगेज़िंग: साफ आसमान और प्राकृतिक रोशनी में बेहतरीन फोटोज़ और रात को तारों को निहारने का अवसर।
- स्थानीय व्यंजन और खरीदारी:
- लोकल फूड: आलू के गुटके, भट्ट की चुड़कानी, भांग की चटनी, बाल मिठाई।
- प्रसिद्ध भोजन स्थल: कुमाऊंनी फार्म कैफ़े, आईहार्ट कैफ़े हिमालयाज, एक्वेरियम आइलैंड कैफ़े।
- शॉपिंग: मॉल रोड और लोकल बाजारों से हस्तशिल्प, मोमबत्तियाँ, लकड़ी के उत्पाद और जैविक वस्तुएँ खरीदें।
कहाँ ठहरें:
- आमोद भीमताल: झील का सुंदर दृश्य और प्रीमियम सुविधाएं, परिवार और कपल्स के लिए उत्तम।
- नीलेश इन: शांति पसंद करने वालों के लिए, मल्टी-कुज़ीन भोजन और फैमिली स्टे के लिए उपयुक्त।
- सात्विक भीमताल: प्रकृति के करीब रहना हो तो यह ईको-फ्रेंडली स्टे बेस्ट है।
- सिल्वर ट्री इन: बजट और सोलो ट्रैवलर्स के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त होटल।
- सोजर्न बाय द लेक: बुटीक स्टे और झील के दृश्यों के साथ स्टाइलिश इंटीरियर्स।
- द पाम होटल: बजट ट्रैवलर्स के लिए प्राकृतिक सौंदर्य के साथ आवश्यक सुविधाओं से युक्त।
भीमताल भले ही नैनीताल जितना प्रसिद्ध न हो, लेकिन इसकी शांति, पौराणिक महत्त्व, सुंदर झीलें और जैव विविधता इसे एक संपूर्ण छुट्टी स्थल बनाते हैं। यहां की हवा में एक ताजगी है जो आपके मन को शांति देती है और यादें बनाकर साथ लौटने देती है। अगली बार जब आप पहाड़ों का रुख करें, तो इस गुप्त खजाने को ज़रूर तलाशें।
By: Anushka Singhal