ओडिशा के पूर्वी तट पर बंगाल की खाड़ी के किनारे स्थित पुरी, भारत के सबसे पवित्र और मनमोहक शहरों में से एक है। ‘चार धाम’ यात्रा में से एक महत्वपूर्ण पड़ाव होने के कारण, यह लाखों भक्तों और पर्यटकों को आकर्षित करता है। पुरी सिर्फ एक तीर्थस्थल नहीं है; यह एक ऐसा स्थान है जहाँ समुद्र की शांत लहरें, प्राचीन मंदिरों की गूँज और जीवंत संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहाँ आप आध्यात्मिक शांति, प्राकृतिक सुंदरता और अनोखे अनुभवों का एक साथ अनुभव करते हैं।
पुरी का नाम भगवान जगन्नाथ के प्रसिद्ध मंदिर से आता है, जो वैष्णवों के लिए सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। यह भारत के चार सबसे पवित्र तीर्थस्थलों (चार धाम) में से एक है, जिसमें बद्रीनाथ, रामेश्वरम और द्वारका भी शामिल हैं। पुरी की हवा में ही भक्ति का अहसास होता है, और यहाँ की संस्कृति पूरी तरह से भगवान जगन्नाथ को समर्पित है। सदियों से, इस शहर ने अपनी आध्यात्मिक विरासत को बरकरार रखा है, साथ ही एक आकर्षक तटीय गंतव्य के रूप में भी अपनी पहचान बनाई है।
पुरी की आत्मा: भगवान जगन्नाथ और रथ यात्रा
पुरी का सबसे बड़ा आकर्षण है – जगन्नाथ मंदिर, जो भारत के चार धामों में से एक है। यह 12वीं शताब्दी का मंदिर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को समर्पित है। इसकी खासियतें जैसे – बिना परछाईं के विशाल शिखर, विपरीत दिशा में लहराता ध्वज, और महाप्रसाद की तैयारी के लिए विश्व का सबसे बड़ा रसोईघर – इसे अद्वितीय बनाती हैं।

Pic credit of Jagannath Rath Yatra @ rathyatra.org
हर साल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को मनाया जाने वाला रथ यात्रा उत्सव पुरी की पहचान बन चुका है। तीन विशाल लकड़ी के रथों में देवताओं को मंदिर से बाहर ले जाया जाता है और लाखों श्रद्धालु रथ खींचते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं। वापसी यात्रा के दौरान (बाहुड़ा यात्रा) “माउसि माँ मंदिर” में पोड़ा पीठा का भोग चढ़ाया जाता है।
पुरी बीच
जगन्नाथ मंदिर से थोड़ी ही दूरी पर स्थित, पुरी बीच एक सुंदर और विशाल समुद्र तट है जो बंगाल की खाड़ी के नीले पानी के साथ मिलता है। आप यहाँ सूर्यास्त और सूर्योदय के अद्भुत दृश्यों का आनंद लेते हैं, जहाँ नारंगी रंग का सूरज समुद्र में घुल जाता है। यह बीच अपनी रेत कला (Sand Art) के लिए भी प्रसिद्ध है, जहाँ विश्व प्रसिद्ध रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक अपनी कृतियों को आकार देते हैं। आप यहाँ आराम करते हैं, समुद्र में डुबकी लगाते हैं, या स्थानीय विक्रेताओं से सीपियों के आभूषण और समुद्री वस्तुएं खरीदते हैं।

पुरी के पास घूमें ये ख़ास जगहें
- कोणार्क सूर्य मंदिर: पुरी से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, कोणार्क सूर्य मंदिर एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और ओडिशा की गौरवशाली स्थापत्य कला का एक अद्भुत उदाहरण है। 13वीं शताब्दी में निर्मित, यह मंदिर सूर्य देवता को समर्पित है और एक विशाल रथ के आकार में बनाया गया है जिसमें बारह जोड़ी पहिए और सात घोड़े हैं। आप इसकी जटिल नक्काशी, मूर्तियों और इसके ऐतिहासिक महत्व को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। यह मंदिर इंजीनियरिंग और कला का एक असाधारण नमूना प्रस्तुत करता है।

- चिल्का झील: पुरी से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित, चिल्का झील एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील है। अपनी समृद्ध जैव विविधता और प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध, यह झील प्रकृति प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग है। आप यहाँ सतपाड़ा से नाव यात्रा करते हैं, जहाँ आप भाग्यशाली होने पर दुर्लभ इरावदी डॉल्फिन को पानी में खेलते हुए देख सकते हैं। सर्दियों में, यह झील हजारों प्रवासी पक्षियों से भर जाती है, जो इसे पक्षी प्रेमियों के लिए एक शानदार स्थान बनाती है।
- रघुराजपुर कलाकार गांव: पटन चित्र कला और पारंपरिक हस्तशिल्प देखने का सबसे सही स्थान।
- पिपिली: रंग-बिरंगे आप्लिक वर्क (कढ़ाई) के लिए प्रसिद्ध।
- रामचंडी मंदिर: शांत नदी किनारे स्थित एक पिकनिक स्थल।
- स्वर्गद्वार बीच: धार्मिक मान्यता अनुसार यहीं से भगवान विष्णु स्वर्ग गए थे।
कैसे पहुँचे?
- रेल मार्ग से: पुरी का अपना रेलवे स्टेशन है, पुरी रेलवे स्टेशन (PURI), जो भारत के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु से सीधी ट्रेनों द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आप आसानी से ट्रेन से पुरी पहुँच सकते हैं।
- हवाई मार्ग से: पुरी का निकटतम हवाई अड्डा बीजू पटनायक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, भुवनेश्वर (Bhubaneswar – BBI) है, जो लगभग 60 किलोमीटर दूर है। यह हवाई अड्डा भारत के प्रमुख शहरों से सीधी उड़ानों द्वारा जुड़ा हुआ है। हवाई अड्डे से, आप पुरी तक पहुँचने के लिए टैक्सी किराए पर ले सकते हैं या बसें ले सकते हैं।
- सड़क मार्ग से: पुरी, ओडिशा और पड़ोसी राज्यों के प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आप भुवनेश्वर, कोणार्क और कटक से नियमित बसें या टैक्सी ले सकते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग भी शहरों को जोड़ते हैं, जिससे आपकी सड़क यात्रा सुविधाजनक बनती है।
पुरी में कहां ठहरें?
- चाणक्य बीएनआर होटल और मेफेयर हेरिटेज – मंदिर और समुद्र तट के पास लक्ज़री सुविधाओं के साथ।
- मरीन ड्राइव के रिसॉर्ट्स – समुद्र के किनारे सुंदर नज़ारे और रोमांटिक माहौल।
- स्थानीय होटलों और होमस्टे – किफायती विकल्प जिनमें स्थानीय अनुभव और आतिथ्य मिलता है।
छोटे सफर के लिए साइकिल रिक्शा और ऑटो रिक्शा उपयुक्त हैं। नजदीकी जगहों को घूमने के लिए टैक्सी या डे-टूर बुक करें।
निष्कर्ष
पुरी केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और आनंदमय अनुभव है। चाहे रथ यात्रा की भव्यता हो, मंदिर की दिव्यता, या समुद्र तट की शांति – हर पहलू यहाँ की आत्मा को दर्शाता है। पुरी की यात्रा केवल दर्शन नहीं, बल्कि आत्मा को तृप्त करने वाली यादगार यात्रा होती है।
अगर आप ऐसी जगह की तलाश में हैं जहाँ दिल को शांति और आत्मा को सुकून मिले, तो पुरी आपका अगला गंतव्य बन सकता है।
By: Anushka Singhal