हिमालय की गोद में बसा नारकंडा वह जगह है, जहाँ प्रकृति अपने सबसे शांत और खूबसूरत रूप में मिलती है। शिमला के बेहद करीब स्थित यह हिल स्टेशन अपने एप्पल ऑर्चर्ड, ऑफबीट ट्रेल्स, देवदार की खुशबू और आसमान को छूती पहाड़ियों के शानदार नज़ारों के लिए जाना जाता है। भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों से दूर, नारकंडा में सुकून, रोमांच और प्राकृतिक सौंदर्य तीनों एक साथ मिलते हैं।
शिमला से केवल 65 किलोमीटर दूर, शिवालिक और धौलाधार पर्वतमालाओं के बीच समुद्र तल से लगभग 2,708 मीटर की ऊँचाई पर स्थित नारकंडा (Narkanda), एक ऐसा शांत और मनमोहक हिल स्टेशन है जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, स्कीइंग और ऐतिहासिक हाटू पीक के लिए प्रसिद्ध है। पुराने हिंदुस्तान-तिब्बत मार्ग (NH-5) पर बसा यह छोटा सा शहर, सेब के विशाल बागानों और देवदार के घने जंगलों से घिरा हुआ है।
पर्यटन के शोरगुल से दूर, नारकंडा उन यात्रियों के लिए एक आदर्श गंतव्य है जो रोमांच (एडवेंचर), आध्यात्मिक शांति और हिमालय के शानदार दृश्यों का एक साथ अनुभव लेना चाहते हैं।

नारकंडा कैसे पहुँचें
हवाई मार्ग से
नारकंडा के सबसे नजदीक जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट (शिमला) है, जो लगभग 78 किमी दूर है। एयरपोर्ट से टैक्सी और बसें सीधे नारकंडा तक जाती हैं। रास्ता पहाड़ों से घिरा और बेहद मनमोहक है।
रेल मार्ग से
कalka से शिमला तक चलने वाली कालका–शिमला टॉय ट्रेन अपने आप में एक अनुभव है। शिमला स्टेशन से नारकंडा 64 किमी दूर है, जिसे बस, टैक्सी या साझा जीप से करीब दो घंटे में तय किया जा सकता है।
सड़क मार्ग से
- शिमला से दूरी: 64 किमी (कुफरी—फागू—थियोग होते हुए)
- चंडीगढ़ से दूरी: लगभग 180 किमी (5 घंटे का ड्राइव)
HRTC वोल्वो, टैक्सियाँ और लोकल बसें नियमित रूप से चलती हैं। सड़क यात्रा अपने शानदार नज़ारों, फोटो पॉइंट्स और टी-स्टॉल्स की वजह से यादगार बन जाती है।
प्रो टिप: सर्दियों में स्नो ड्राइविंग रोमांचक होती है, लेकिन सड़क की स्थिति पहले ज़रूर चेक करें।
हाटू पीक: बादलों के ऊपर बसा नारकंडा का ताज
नारकंडा की सबसे शानदार जगह है—हाटू पीक, जो समुद्र तल से करीब 3,400 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ तक 7 किमी ट्रेक या सावधानीपूर्वक ड्राइव करके पहुँचा जा सकता है। रास्ते में घने देवदार, बर्च और फ़िर के जंगल सुरंग जैसा अनुभव कराते हैं।
पैनोरमिक दृश्य: हाटू पीक से, पर्यटक श्रीखंड महादेव सहित हिमालय पर्वतमाला का 360-डिग्री विहंगम दृश्य देखते हैं। चारों ओर देवदार, ओक और मेपल के पेड़ों के घने जंगल फैले हुए हैं, जो हरे-भरे कालीन जैसा दृश्य बनाते हैं।
हाटू माता मंदिर: पीक की चोटी पर लकड़ी की विशिष्ट हिमाचली वास्तुकला शैली में बना हाटू माता मंदिर स्थित है। यह मंदिर देवी काली का रूप मानी जाने वाली हाटू माता को समर्पित है।
पौराणिक मान्यताएँ: स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण लंकापति रावण की पत्नी मंदोदरी ने करवाया था। एक अन्य मान्यता यह है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहाँ समय बिताया था। मंदिर के पास ही मौजूद तीन विशाल चट्टानों को ‘भीम का चूल्हा’ कहा जाता है, जहाँ पांडव भोजन बनाते थे।
प्रो टिप:
- सूर्योदय देखने सुबह जल्दी जाएँ
- दिसंबर–फरवरी में पूरा रास्ता बर्फ से ढका मिलता है – मानो किसी सफ़ेद जादुई दुनिया में हों

नारकंडा के प्रमुख और ऑफबीट आकर्षण
1. तानी जुब्बड़ झील
देवदार के पेड़ों से घिरी शांत झील, पिकनिक और फोटोग्राफी के लिए परफेक्ट स्पॉट।
2. जोर बाग
भीड़ से दूर हरा-भरा बड़ा मैदान जहाँ कैम्पिंग, बर्डवॉचिंग और स्टार-गेज़िंग बेहतरीन अनुभव देते हैं।
3. स्टोक्स फार्म (एप्पल ऑर्चर्ड)
हिमाचल के सबसे बेहतरीन सेब यहीं उगते हैं। ऑर्चर्ड वॉक, जूस टेस्टिंग और फोटो क्लिक करना अनुभव को खास बनाता है।
4. महामाया मंदिर
प्रकृति से घिरा पुराना मंदिर, जहाँ शांति और आध्यात्मिकता दोनों मिलते हैं।
5. नारकंडा स्कीइंग पॉइंट
सर्दियों में यह जगह बिगिनर–फ्रेंडली स्की स्लोप्स के लिए मशहूर है।
6. स्थानीय बाजार
ऊन के कपड़े, हस्तशिल्प, विंटर गियर और प्रसिद्ध नेगी ढाबा की गरमा–गरम मैगी जरूर ट्राय करें।
नारकंडा में कहाँ ठहरें
The Wild Peaks: कुदरती नज़ारों, धूप वाली बालकनियों और स्वादिष्ट लोकल फूड के लिए मशहूर।
The Morel House: हेरिटेज वाइब, शांत लोकेशन और शानदार सूर्योदय नज़रे।
Aaramgah: देवदार जंगलों के बीच स्थित एक शांत, रोमांटिक और आरामदायक प्रॉपर्टी।
The Hosteller Narkanda: यंग बैकपैकर्स के लिए कम्युनिटी वाइब्स और हाटू पीक के पास स्थित।
स्थानीय होमस्टे भी गर्मजोशी, हिमाचली खाने और स्थानीय जीवन का असली अनुभव देते हैं।

घूमने का सबसे अच्छा समय:
- अप्रैल से जून: सुहावने मौसम और ट्रेकिंग के लिए।
- अक्टूबर से नवंबर: सेब के बागानों और ट्रेकिंग के लिए।
- दिसंबर से मार्च: बर्फबारी और स्कीइंग के रोमांच के लिए।
लोकल ट्रेवल टिप्स
- शहर में ऑटो, टैक्सी और बाइक रेंट आसानी से मिल जाते हैं।
- तानी जुब्बड़ और जोर बाग पैदल भी जाया जा सकता है।
- लंबी दूरी के लिए कैब बुक करें — जैसे थनादार, कोटगढ़ या सतलुज नदी किनारा।
क्या पैक करें
- लेयर्स वाले कपड़े (हर मौसम में जरूरत)
- मजबूत जूते
- टॉर्च, पावर बैंक
- कैमरा और दूरबीन
- पानी की बोतल, स्नैक्स, सनस्क्रीन
- विंटर में ग्लव्स, टोपी और वूलन जैकेट
ऑफबीट डिटूर्स
थनादार–कोटगढ़
देश के सबसे पुराने एप्पल वैली — शांत, सुंदर और फोटोजेनिक।
सराहन–भीमाकाली मंदिर
गहरी घाटियों और पुराने हिमालयी स्थापत्य का अद्भुत संगम।
रामपुर – सतलुज नदी किनारा
पुराना हिल-टाउन, नदी किनारे पिकनिक स्पॉट और धीमी जीवन रफ़्तार।
कुफरी–फागू
शानदार व्यू पॉइंट्स और लाइट ट्रेक्स।
निष्कर्ष
नारकंडा सिर्फ एक हिल स्टेशन नहीं—यह हिमालय के बीच छिपा शांति, रोमांच और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम है। हाटू पीक पर सूर्योदय हो या ऑर्चर्ड में सुबह की सैर, बर्फीली ढलानों पर स्कीइंग हो या जंगलों में शांत दोपहर, नारकंडा हर यात्री को एक ऐसा अनुभव देता है, जो दिल में हमेशा के लिए बस जाता है।
By: Anushka Singhal


